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अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर से पहले वाशिंगटन में चल क्या रहा था, जानें पर्दे के पीछे की कहानी

 Published : Apr 08, 2026 05:15 pm IST,  Updated : Apr 08, 2026 05:15 pm IST

अमेरिका और ईरान के बीच जो सीजफायर हुआ है उसे पीछे की कहानी भी दिलचस्प है। चलिए जानते हैं कि ट्रंप की सभ्यता खत्म करने वाली धमकी और सीजफायर समझौते के बीच क्या-क्या हुआ था।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप- India TV Hindi
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप Image Source : AP

US Iran Ceasefire: अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जंग जारी थी। जंग के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सभ्यता खत्म करने वाली धमकी दी। समझौता करने या तबाही झेलने के लिए ट्रंप ने जो डेडलाइन ईरान को दी थी वो नजदीक आती जा रही थी। दुनिया असमंजस में थी और फिर कुछ ऐसा हुआ कि पूरी दुनिया ने राहत की सांस ली। ईरान और अमेरिका सीजफायर पर सहमत हो गए। सीजफायर तो गया लेकिन इस बीच पर्दे के पीछे क्या-क्या हुआ अब इस बारे में  जानकारी सामने आई है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में इसकी पूरी टाइमलाइन बताई गई है, चलिए जानते हैं। 

आखिरी घंटों में पर्दे के पीछे क्या हुआ?

वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार मंगलवार को जब ट्रंप सार्वजनिक रूप से बड़े पैमाने पर विनाश की धमकी दे रहे थे उसी समय पर्दे के पीछे बातचीत तेज हो रही थी। मिडिल ईस्ट में तैनात अमेरिकी सेना और पेंटागन के अधिकारी आखिरी घंटों में ईरान के ढांचे पर बड़े बमबारी अभियान की तैयारी कर रहे थे। इतना ही नहीं खाड़ी में अमेरिका के सहयोगी देश भी ईरान की बड़ी जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार हो रहे थे।

सुबह 8:06 बजे (वाशिंगटन समय): ट्रंप ने सबसे अल्टीमेटम जारी करते हुए कहा कोई समझौता नहीं होता तो एक पूरी सभ्यता खत्म हो जाएगी, जिसे फिर कभी वापस नहीं लाया जा सकेगा। ट्रंप ईरान को तबाह करने की धमकी दे रहे थे।

सुबह 9 बजे: रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने चेयरमैन, जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ जनरल डैन केन और US सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग शुरू की, ताकि ईरान के बुनियादी ढांचों पर दिन भर होने वाले हमलों की योजना बनाई जा सके।

पोप लियो से लेकर दुनिया के कई नेताओं ने ट्रंप से फोन पर बात की और उनसे पीछे हटने की अपील की। ​​जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ा, US के सहयोगी देशों की ओर से दबाव के शुरुआती संकेत मिलने लगे। सहयोगी चाहते थे कि डेडलाइन को आगे बढ़ाया जाए।

दोपहर 3 बजे (वाशिंगटन समय): पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सार्वजनिक रूप से US से अस्थायी युद्धविराम स्वीकार करने की अपील की और ईरान से इस दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने का आग्रह किया।

पूरी दोपहर, ट्रंप ओवल ऑफिस में अपने खास सहयोगियों के साथ व्यस्त रहे। वो फोन कॉल ले रहे थे और युद्धविराम के प्रस्तावों के नफे-नुकसान पर विचार-विमर्श कर रहे थे।

शाम 6:32 बजे (वाशिंगटन समय): ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर ऐलान किया, "इस शर्त पर कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह, तत्काल और सुरक्षित रूप से खोलने पर सहमत हो जाए, मैं 2 सप्ताह की अवधि के लिए ईरान पर बमबारी और हमले को रोकने (निलंबित करने) पर सहमत हूं।"

रात 9 बजे (वाशिंगटन समय): इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ने घोषणा की, "उच्चतम स्तर पर यह निर्णय लिया गया है कि ईरान इस्लामाबाद में 2 सप्ताह तक बातचीत करेगा। इसका यह अर्थ नहीं है कि युद्ध समाप्त हो गया है। ईरान ने कहा कि वो शर्तों के साथ ही युद्ध की समाप्ति को स्वीकार करेगा।

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